तुमने हमसे हमको चुराया दिल में अपने हमको बसाया हम कुछ दीवाने हो गये हैं हाँ, दूर ख़ुद से हो गये हैं अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम अपनी बाँहों में हमको छुपा लो सनम यह उड़ते बादल घिर जायें बिजली ज़रा … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तुमने हमसे हमको चुराया दिल में अपने हमको बसाया हम कुछ दीवाने हो गये हैं हाँ, दूर ख़ुद से हो गये हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने किस गली में, मैं चाँद भूल आया हूँ जाने किस गली में चाँद मुझे भूल आया है तन में जो जलती है रफ़्ता … more →