राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन नही सुने जाते जमाने के ताने उस पर न आने के तेरे लाख बहाने आँखें है बंजर ,कैसे नीर बहाए सुलगती किरने आकर तनमन जलाए तुझसे मिलने करूँ सागर का मंथन … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन नही सुने जाते जमाने के ताने उस पर न आने के त … more →