चँदनी रात है नींबुआ के पीछे छुपा बैठा जो मध्यम मध्यम मुस्कुराता रहता वो मेरे सलोने चाँद से सजना मैं हूँ कितनी पशेमा पशेमा आज दिल की जमी पर, उतर कर आभी जाओ चँदनी रात है , अपनी चँदनी तो बरसाओ | फ़िज़ाए … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: चँदनी रात है नींबुआ के पीछे छुपा बैठा जो मध्यम मध्यम मुस्कुराता रहता वो मेरे सलोने चाँद से सजना मैं … more →