एक पानी में भीगी हुई किताब जाने किसने? सूखने के लिए रख दी है धूप में जैसे जैसे नमी भाप बनती है पन्ने फड़फड़ाकर खुलने लगते हैं नीली स्याही से लिखे हर्फ़ भीगने से धुँधले पड़ गये हैं और… चश्मा लगाकर… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: एक पानी में भीगी हुई किताब जाने किसने? सूखने के लिए रख दी है धूप में जैसे जैसे नमी भाप बनती है पन्ने … more →