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क्षमादान सदैव उचित नहीं - महाकाव्य महाभारत में युधिष्ठिर के प्रति द्रौपदी की सलाह

योगेन्द्र जोशी wrote 4 weeks ago: महाकाव्य महाभारत के वन पर्व में पांडवों के बारह-वर्षीय वनवास के समय उनके द्वारा भोगे गये कष्टों का व … more →

Tags: नीति, प्राचीन-भारत, महाभारत, संस्कृत-साहित्य, Mahabharata, क्षमादान, द्रौपदी, पांडव, युधिष्ठिर

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ इत्यादि - मनुस्मृति के वचन2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 2 months ago: ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते …’ कहते हुए समाज में स्त्रियों को सम्मान मिलना चाहिए की बात अक्सर सु … more →

Tags: नीति, प्राचीन-भारत, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, मनुस्मृति, यत्र नार्यस्तु पूज्, हिंदू समाज, Hindu society, manusmriti

‘सत्यं वद, धर्मं चर, ...’ - तैत्तिरीय उपनिषद् के उपदेशात्मक मंत्र

योगेन्द्र जोशी wrote 3 months ago: अपने आरंभिक छात्रजीवन के समय संस्कृत पाठ्यपुस्तकों में मैंने “सत्यं वद । धर्मं चर ।… मातृदेवो … more →

Tags: उपनिषद्, दर्शन, नीति, वेद, UPANISHADA, ved, Anuvak, अनुवाक, तैत्तिरीय उपनिषद्

महाभारत प्रकरण: यक्ष-युधिष्ठिर संवाद - महाजनो येन गतः सः पन्थाः1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 5 months ago: महाकाव्य महाभारत में ‘यक्ष-युधिष्ठिर संवाद’ नाम से एक पर्याप्त चर्चित प्रकरण है । संक्षेप में उसका व … more →

Tags: अध्यात्म, दर्शन, नीति, लोकव्यवहार, महाभारत, Philosophy, Mahabharata, पांडव, जीवधारी

छिद्रेष्वनर्था बहुलीभवन्ति - संस्कृत नाट्यकृति मृच्छकटिकम् की उक्ति

योगेन्द्र जोशी wrote 5 months ago: अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब मनुष्य किसी एक विपत्ति का सामना कर रहा होता है तो और भी कई अड़चनें उ … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, नाटक, मृच्छकटिक, छिद्रेष्वनर्था बहुल, मृच्छकटिकम्, Mruchchhakatikam, संस्कृत नाट्यकृति

लोभः पापस्य कारणम् (हितोपदेश) - लोभ से प्रेरित होती है ठगी

योगेन्द्र जोशी wrote 5 months ago: इधर कुछ दिनों से टीवी समाचार चैनलों पर ठगी के मामलों की चर्चा सुनने को मिल रही हैं । बताया जा रहा है … more →

Tags: दर्शन, नीति, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, हितोपदेश, महाभारत, लोभ, तृष्णा, Mahabharata

श्वः कार्यमद्य...यानी काल करै सो आज... (महाभारत)

योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: महाकाव्य महाभारत के शान्तिपर्व में पितामह भीष्म द्वारा युधिष्ठिर को विविध उपदेश दिये जाने का विस्तृत … more →

Tags: नीति, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, महाभारत, हिन्दी साहित्य, Mahabharata, कबीर, भीष्म, युधिष्ठिर

गतानुगतिको ... : लकीर का फकीर यह संसार

योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: अपने छात्रजीवन में मैंने एक नीतिश्लोक पढ़ा था जो मुझे अपनी कमजोर स्मरणशक्ति के बावजूद आज भी याद है, श … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, कथा, अंध नकल, लकीर का फकीर, व्यवहार, शिवलिंग

जैसा आचरण राजा का वैसा ही प्रजा का2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मैंने पहले कभी (31 अक्टूबर) महर्षि बाल्मीकिविरचित रामायण में उल्लिखित राम-जाबालि संवाद की चर्चा की थ … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, राजा, रामायण, प्रजा, स्वेच्छाचार, ramayana

नीतिवचन महाभारत से - दुष्कर्म के लिए पुरुष दोषी

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: महाकाव्य महाभारत के शांतिपर्व के अंतर्गत मोक्षधर्म पर्व के अध्ययन से यही लगता है कि स्त्रीजाति के प् … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, महाभारत, प्राचीन-भारत, Mahabharata, नीतिवचन, गौतम, चिरकारी, दुष्कर्म

सुभाषित: कृतघ्नता वृक्षों के प्रति1 comment

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मेरे पास सुभाषितमाला नाम की एक पुस्तक है, श्री अरविंद आश्रम, पुदुच्चेरी (पूर्व में पांडिचेरी) से प्र … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, सूक्ति, ग्वोबल वार्मिंग, सुभाषितमाला, Global Warming, Subhashitamala


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