मैं कविता लिखती हूँ लोगो ने मुझसे पूछा,तुम ऐसी कैसी हो बाहर से पिघला मक्खन,अंदर से मोम जैसी हो | इतनी कोमल भावनाए,तुम कैसे रखती हो अनजान के दर्द में भी तुम सिसकती हो | इस नश्तर जहा में,गर कदम तुम्… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: मैं कविता लिखती हूँ लोगो ने मुझसे पूछा,तुम ऐसी कैसी हो बाहर से पिघला मक्खन,अंदर से मोम जैसी हो | … more →