कभी ख़त्म ना होनेवाला रेगिस्तान हो जैसे अक्सर हमे जीवन के पल प्रतीत होते है ऐसे उँचे तूफ़ानो के बवंडर ,दिल को झेले ना जाए पराकाष्ठा हो प्रयत्नो की,पर वो थम ना पाए रेत के नन्हे से कन हवाओ में उड़ते रहत… more →
mehhekk wrote 1 year ago: कभी ख़त्म ना होनेवाला रेगिस्तान हो जैसे अक्सर हमे जीवन के पल प्रतीत होते है ऐसे उँचे तूफ़ानो के बवंड … more →
Tags: prakashit kavitayein, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Sher, Mehek, manzil, mehhekk, Blogroll
Follow this tag via RSS