अजीब सी राहें ज़िंदगी में कितनी अजीब सी राहें शामिल है तुम भी गुज़रे उनपर हम भी चले है दुआयें माँगी उसकी दरबार में,कबुल हुई नेमत-ए-मुलाकात में तेरे निशान मिले है | … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: अजीब सी राहें ज़िंदगी में कितनी अजीब सी राहें शामिल है तुम भी गुज़रे उनपर हम भी चले है दुआयें माँगी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: रेशम सी किरने,एक नया सवेरा फूलों में बदली सारी कलिया कही दव की बूँदे ,थोड़ी पत्तियों की शरारत सारी … more →