कमबख्त! अजीब खेल है ये इश्क और दीवानगी का, चैन उम्मीद करते हैं खुद को कांटे चुभोने के बाद, क्या चला गया ये सोचना तो फिजूल ही था, क्या रह गया, ये सोचा नहीं तुझे खोने के बाद, तबसे ना देखा तुझे ना तेरा न… more →
ApurnShubhashish Pandey wrote 1 year ago: कमबख्त! अजीब खेल है ये इश्क और दीवानगी का, चैन उम्मीद करते हैं खुद को कांटे चुभोने के बाद, क्या चला … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: शिक्षक दिवस के अवसर पर ये चार पंक्तियाँ गुरुजनों को समर्पित … ज्ञान से ज्यादा मूल्यवान क्या है … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: 1) अक्सर कुछ उदास हो एक मोड़ पे आ ठहरता है, जाने कौन सा रिश्ता है ये .. ना बनता है ना बिखरता है ! 2) … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: दर्द कितना हो पर आंखे आसूवों को रोने नहीं देतीं मेरी बेखुदी मेरे इश्क की खबर तेरी यादों को भी नहीं ह … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: चाह के भी जिससे कोई राज छुपाया नहीं जाता है कभी हँसाता कभी रुलाता पर हर पल साथ निभाता है खून का तो न … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: दिल में दर्द दबाने की आँखों में नमी छुपाने की हर कोशिश कर के हार गए हम तेरी याद भूलाने की तेरी चाहत … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: इश्क ने यहाँ कितनों को कोई और मुकद्दर दिया दिल को तन्हाई तो आँखों को समंदर दिया इबादत-ए-इश्क में जिस … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: ऐसा नहीं की अब सब कुछ बदल गया पर हाँ हमने खुद को जरुर बदल डाला है कुछ हासिल नहीं होता छटपटाने से सो … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: “अरे इतनी सी बात पे परेशान होने की क्या जरुरत ये लो तुम मेरी फाइल दिखा देना,हाँ मेरी राइटिंग थ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: दर्द सीने में सिसकता रहा है रात भर, यादों का सिलसिला चलता रहा है रात भर, एक बार फिर से माफ़ कर दूं उ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: समझ नहीं आता की क्या कर डालूँ मैं तुम्हें बदलने की कोशिश करूं या खुद को बदल डालूँ मैं अब और यही दर्द … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जीने के लिये इस दुनिया में कुछ खास नही रह जाता है सब कुछ होता है फिर भी कुछ पास नही रह जाता है खुद अ … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जब गम तेरा देख के दिल मुझसे नही सम्भलता है तो तेरी खुशियों की खातिर ये यूं ही दिन रात जलता है ऐसे तो … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: यौवन के मद में अनियंत्रित, सागर में खो जाने को आज चला था पैसो से मैं यौवन का सुख पाने को दिल की धड़क … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: धोखे से लूट ले जा सकते हो तुम भी, पर कोशिश न करना कीमत लगाने की, जिसके बदले में बिक जाये इमान मेरा, … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: करते हैं वही जो हमारा उसूल है, युं ही समझ जाओगे हमें तुम्हारी भूल है, बहुत गहरा समन्दर है मेरे जज्बा … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: भगवान को मानना तो जाने कब से छोड़ दिया है पर मंदिर के सामने बिना कुछ सोचे ही सर झुक जाता है कम्बख्त क … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: सच कहू तो बस एक ख्वाब हो तुम, दोस्ती नही की तुम से कुछ पाने के लिए, अपनी बातों से बस तुम्हे हॅसाना च … more →
Shubhashish Pandey wrote 1 year ago: जो भी जॉब के लिए घर से दूर हैं शायद उन सब के दिल में यही जज्बात होंगे | ये चार लाईने मैं अपनी माँ क … more →