हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले, अजनबी जैसे अजनबी से मिले, हर वफ़ा एक जुर्म हो गया, दोस्त कुछ ऎसी बेरुखी से मिले, फूल ही फूल हमने मांगे थे, दाग ही दाग जिंदगी से मिले, जिस तरह आप हम से मिलते हैं, आदमी यूं… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले, अजनबी जैसे अजनबी से मिले, हर वफ़ा एक जुर्म हो गया, दोस्त कुछ ऎसी बेरुख … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मेरे दरवाज़े से अब चाँद को रुकसत कर दो, साथ आया है तुम्हारे जो तुम्हारे घर से, अपने माथे से हटा दो ये … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हम भी शराबी तुम भी शराबी! छलके गुलाबी छलके गुलाबी! तक़दीर दिल की खाना खराबी !! जब तक है जीना खुष होके … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तमन्नाओ के बहलावे में अक्सर आ ही जाते है, कभी हम चोट खाते है, कभी हम मुस्कुराते है! हम अक्सर दोस्तों … more →