अपने जब दूर जाते है तो बहुत दर्द देते है पर अपने जब पास रह कर भी दूरिया बना लेते है तो दिल में एक कसक छोड़ जाते हैै… more →
कुछ िदल सेmehhekk wrote 3 months ago: एक चुप्पी हमारे लबों पर बैठी ताले सी चाबी का गुच्छा तेरी अल्लड मुस्कान … more →
kmuskan wrote 9 months ago: अपने जब दूर जाते है तो बहुत दर्द देते है पर अपने जब पास रह कर भी दूरिया बना लेते है तो दिल में एक कस … more →
kmuskan wrote 10 months ago: कभी कभी चंद कदमो का फासला दुनिया बदल देता है चंद कदमो का फासला ज़िन्दगी-भर का फासला बन जाता है चंद क … more →
kmuskan wrote 11 months ago: दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दा … more →
kmuskan wrote 11 months ago: कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उद … more →
kmuskan wrote 11 months ago: वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ … more →
kmuskan wrote 11 months ago: तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है कि महफ़िल से डर लगता है किसी के जाने से तो कभी ना डरे पर किसी के आने … more →
kmuskan wrote 12 months ago: उन वीरो को नमन जिन्होंने उन आंतकवादियो से लोहा लेते हुए अपनी जान गवां दी है मुंबई में ताज ,नरीमन हाउ … more →
kmuskan wrote 1 year ago: इक सपना टूटा आँख से आंसू बहा कुछ देर तक दिल बेचैन रहा उदास रहा पर फिर जैसे ख़ुद-ब-खुद सब ठीक हो गया … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िन्दगी जाने तू क्या चाहती है जाने किस मोड़ पे मुझे लिए जा रही है मेरे खवाबो ,मेरी तम्मनाओ को पीछ … more →
kmuskan wrote 1 year ago: आज बहुत दिनों बाद यहाँ आई। इतने दिनों तक कुछ लिखा ही नही । कुछ लोगो ने मुझे ईमेल भेजकर मुझसे ये जानन … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →
kmuskan wrote 1 year ago: कहने को तो पानी का एक कतरा है पर कितने ही जज्बातों का दरिया है हर सपने को बड़े प्यार से आँखों में छु … more →
kmuskan wrote 1 year ago: फ़िर से लग गई है दुकाने फ़िर से सज गए है बाज़ार दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है धमाके के मंजर को भू … more →
kmuskan wrote 1 year ago: कभी कभी ये सोचती हूँ कि क्या आंतकवादी इंसान नही होते अगर होते है तो क्यों उनकी आत्मा उन्हें धिक्कारत … more →
kmuskan wrote 1 year ago: वो फूल ही कया जिसमे खुशबू ना हो वो दिल ही कया जिसमे किसी का पयार न हो वो पयार ही कया जिसमे दरद ना हो … more →
kmuskan wrote 1 year ago: अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है जानती हूँ ,तू शामिल नही … more →
kmuskan wrote 1 year ago: आज फिर कान्हा धरती पर आएँगे फिर लीला दिखलाएँगे फिर मटकी तोड़ के माखन चुराएंगे आज फिर कान्हा धरती पर आ … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ये मेरी लिखी पहली कविता है इसे मैंने स्कूल के दिनों में लिखा था इसकी अन्तिम पंक्ति में मेरी फ्रेंड न … more →