यूही शाम ढलते तेरा चुपके से आना परदे के पीछे खड़ी होकर मासूम मुस्कुराना चाय का लुत्फ़ लेता अख़बार में खोया मैं हवाओ संग लफ़्ज़ों का कानो में गुनगुनाना हक़ीक़त थी तुम कभी,आज वक़्त का साया हो याद बह… more →
mehekmehhekk wrote 10 months ago: यूही शाम ढलते तेरा चुपके से आना परदे के पीछे खड़ी होकर मासूम मुस्कुराना चाय का लुत्फ़ लेता अख़बार … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुस्कुराहट के गुलाब मुस्कुराहटसे सजे जो लब , नूर-ए-शबाब खिले है एक मुस्कुराहट में हमारी , हज़ारो गुल … more →
mehhekk wrote 2 years ago: दीदार खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात सज सवर कर बैठी है नही करती किसीसे बात कुछ भी कहो ,गुलाब … more →