एक लम्बे अरसे बाद आज मैं आवाजें पर लौटा हूँ और इस बिलम्ब के लिए आवाजें के पाठकों से माफ़ी चाहूँगा| हबीब तनवीर जी पर लिखे और हिमाचल मित्र पत्रिका के शरद अंक में छपे अपने एक लेख को आपके समक्ष रख रहा हूँ … more →
आवाजें - बेखौफ गूंज़ती हुईAjay Saklani wrote 6 days ago: एक लम्बे अरसे बाद आज मैं आवाजें पर लौटा हूँ और इस बिलम्ब के लिए आवाजें के पाठकों से माफ़ी चाहूँगा| हब … more →
Ajay Saklani wrote 6 months ago: हिन्दी समय कार्यक्रम चल रहा था, और मशहूर रंगकर्मी और निर्देशक हबीब तनवीर जी के नाटक “चरणदास चो … more →
Ajay Saklani wrote 6 months ago: हमारे देश के विद्वान् लगातार इस बात पर ज़ोर देते रहते हैं कि हम हिन्दुस्तानी होकर शायद अपनी भाषा हिन् … more →
Ajay Saklani wrote 6 months ago: सन 2000 को हमने बड़ी धूमधाम से मनाया था| एक ओर जहाँ नए साल का आरम्भ होने जा रहा था वहीँ हम एक नई सदी … more →
Ajay Saklani wrote 6 months ago: बस 6 किलोमीटर दूर था मेरा स्कूल मेरे घर से, पर फिर भी घर वालों को चिंता होती थी कि बच्चे स्कूल कैसे … more →
Ajay Saklani wrote 6 months ago: गुलाम हो गया था वो लहू जो नसों मे दौड़ रहा था उसकी,होश कहाँ था उसे अब आज़ादी का|| मसलते रहे, नोचते रह … more →
Ajay Saklani wrote 6 months ago: सच कहूँ तो प्यार हो गया था मुझे उन दिनों| एक अजीब सी बेचैनी रहती थी| मुशिकिल था मेरे लिए भुलाना उन आ … more →
Ajay Saklani wrote 6 months ago: सुबह के 8 बज चुके थे और अभी तक एक शांति भरा माहौल बना हुआ था| अरुणा अपने 7 साल के बेटे को नहा धुला क … more →