सावन के पानी में छप छप करना किसी के मुख मुस्कान वास्ते जानबूझ कीचड़ में फिसलना वो हर्ष के धब्बे उठे मौजूद है मन की काँच पर आज भी… ============== दूर नभ में स्थित हो मन मचलता है तुम्हे पान… more →
mehekwrote 11 months ago: सावन के पानी में छप छप करना किसी के मुख मुस्कान वास्ते जानबूझ कीचड़ में फिसलना वो हर्ष के धब्बे उ … more →
wrote 1 year ago: नीले नभ की छुपी नीलाई शामल घटाए उस पर छाई बदरा उमड़ घूमड़ कर आई अपनी संगिनी को रहे पुकार इठलाती,बलखा … more →
wrote 2 years ago: नभ आज दारी आले वेड्या मनास कोण समजावी उंच उडाले निळ्या आकाशी सोडून मला एकटेच भरकटले कदाचित मग थोडे घ … more →
wrote 2 years ago: मेघा बरसो रे आज मौसम बदल रहा है ,एक नया अंदाज़ लाया बहती फ़िज़ायो संग रसिया का संदेसा आया आसमान पर ब … more →