तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच निकलते है | अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से … more →
mehhekk wrote 1 year ago: न जाने क्यों वो ये कैसे सोच लेता है के उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है साथ होकर भी तरन्नुम-ए-खामो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन नही सुने जाते जमाने के ताने उस पर न आने के त … more →
mehhekk wrote 1 year ago: समान विषमता बापू और अम्मा का छोटा परिवार एक बेटी एक बिटवा दो ही बच्चे हमार कहते है सबसे दोनो को ख … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आयो होली को त्योहार बिखरी फागुन की बहार मनवा झूमे हमार चढ़ता मस्ती का खुमार ढोल मंजीरे ढ़म ढ़म … more →
mehhekk wrote 1 year ago: होली //1// मन में घुली मीठी गुझिया सी बोली हो प्यार के रंग लगाओ दुश्मन या सहेली हो | गुबार वो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: जीवन का एक और पन्ना पलट गया अगला अध्याय लेकर आया, एक और साल नया पिछला जो अच्छा है ,उसको साथ लेकर चलन … more →
mehhekk wrote 1 year ago: जनमानस सब जिंदा तो है पर मन की भावनाए मरी हुई बाहरी काया ही आकर्षित करती आत्मा दबी,जैसे कठपुतली सजी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हसरतो के कमल आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं … more →
mehhekk wrote 1 year ago: लकीरें माना ये हाथों की लकीरों ने किस्मत के राज़ छुपाए शातिर है वो,ज़िंदगी के पूरे मोहरे तुम्हे नही … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ख्वाब अँखियों की पलकों में समाए ये रहते मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु से … more →
mehhekk wrote 1 year ago: गुलदस्ता - मोहोब्बत का [1] फ़िज़ा के रंग कुछ सवरने लगे है हवाओं के रुख़ कुछ बदलने लगे है सुस् … more →
mehhekk wrote 1 year ago: धूप का रेशमी टुकड़ा दिन की पहली प्रहर में कोई दस्तक सुनाई दी झरोखे से देखा छुपकर वो खड़ा था मेरी दह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: प्यार और दर्द का गहरा रिश्ता होता है दोनो है अलग फिर भी हमे भिगोता है | दोनो में ही आँखों से निकलते … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ताश सी ज़िंदगी //1// लगती है हमे कभी कभी ये ज़िंदगी ताश की गडडी सी इंसान सब ताश के पत्ते खेल खेलता व … more →
mehhekk wrote 1 year ago: फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा | फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन कर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तकदीर ने कुछ अनकहे फ़ैसले सुनाए कबुल कर उन्हे सराखों पर लिये है | ये दर्द छलक कही नासूर ना बन जाए … more →
mehhekk wrote 1 year ago: इश्तेहार के मारे रास्ते, कुचे, घर, मुहल्ले जहा भी देखो लगे बेशुमार आज अगर मशहूर होना है लगा दो बड़ा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते | इश्क़ की मुश्किल डग … more →