मैंने जब हिन्दी में ब्लॉगिंग शुरु की उस समय से इस समय की कुछ दशा ही और है ! वैचारिक मतभेद तब भी थे लेकिन गोलबन्दियों के खाँचे खिड़कियों की गुंजाईश लिए हुए थे । एक बार सागर नाहर ने चिट्ठेकारी बन्द करने … more →
शैशवprithvi wrote 4 months ago: प्राचीन सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे हुआ. आबादियां जोहड़ों, सरोवरों के किनारे बसीं. आधुनिक था … more →
अफ़लातून wrote 6 months ago: मैंने जब हिन्दी में ब्लॉगिंग शुरु की उस समय से इस समय की कुछ दशा ही और है ! वैचारिक मतभेद तब भी थे ल … more →