पीलीभीत से भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी का औपचारिक नाम फिरोज वरुण गांधी होने की चर्चा मैंने कल ही की थी । इस पोस्ट को उम्मीद से ज्यादा ’टीपें’ मिल गयी । एक विचारधारा विशेष के विद्वान ने कहा है - उदहारण … more →
शैशवअफ़लातून wrote 7 months ago: पीलीभीत से भाजपा प्रत्याशी वरुण गांधी का औपचारिक नाम फिरोज वरुण गांधी होने की चर्चा मैंने कल ही की थ … more →
विनय wrote 11 months ago: Mushy thoughts are chasing my way There’s no more to happen on Elsewhere find the words to say … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा … more →
विनय wrote 1 year ago: फिर वही दर्द, वही शाम है लबों पर फिर तेरा नाम है ज़िन्दा हूँ पर ज़िन्दगी नहीं सीने में साँसों का ताम-झ … more →
विनय wrote 1 year ago: यह जिस्म नहीं है, काँच के टुकड़े हैं ज़मीने-वक़्त पर दूर तक बिखरे हैं इन्हें मत छूना हाथों में चुभ जाय … more →
विनय wrote 1 year ago: जाने कैसी तन्हाई रहती है महफ़िले-यार में दिल में अब भी साँस लेते हैं वह पुराने नाम तुमने मुझे भुलाके … more →
विनय wrote 1 year ago: जब भी तेरा नाम लेती हैं बहुत ख़ुश होती हैं आँखें मुस्कुराती हैं तेरे लबों से कहीं ज़्यादा हसीं होके … more →
विनय wrote 1 year ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ तक न गिरा अबकि हारे तो टूट जाये ‘नज़र’ मेरे दिलसित … more →
विनय wrote 1 year ago: ‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका नाम रटे जो लिख दे वह नाम दिल पर कभी न मिटे जी … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर से बातें करता रोज़ मैं पास मेरे जो तेरी कोई तस्वीर होती तुम्हें प्यार बेइंतिहाँ प्यार करत … more →
विनय wrote 1 year ago: मैंने तेरा नाम नहीं जाना जाना तो जाना बस इतना जाना प्यार में तेरे मैं हो गया दीवाना पहली नज़र में होश … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश निगाह तेरी क्या बातें करती है आँखों में रहती है व नींदों में बहती है दिल की बात करें क्या एक … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हमें यह वादा दे दो आओ तो फिर जाओ ना अपनी हँसी से यह घर सजा दो … more →
विनय wrote 1 year ago: In my eyes You live only Without you I live lonely When you’re coming Tell me baby When you … more →
विनय wrote 1 year ago: तो अब दोस्त रह गये बस नाम के हम अज़ीज़ है जब तक हैं काम के मेरे माज़ी से चुरा ले जाता काश कोई सारे टुक … more →
विनय wrote 2 years ago: मैं ईज़ा1 में पड़ा नदामत2 को तड़पता रहा जैसे शोला बुझती आग में भड़कता रहा मैं कमरे में बैठा खोया रहा … more →
विनय wrote 2 years ago: I know I’m lost you’re gone We will never meet again But I want a day to love you I wanna make love … more →
विनय wrote 2 years ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतलब निकालते हैं लोग हुआ कब मुझ से उनका बुरा किसलिए नाम मेरा उछाल … more →