सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा | ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर भी मैं नारी वक़्त पड़े जब रक्षा करने बनू तलवार दो धारी | बहेती रहूंगी हरियाली बिछाती पाने अपना लक्ष… more →
mehekrina56 wrote 2 months ago: सिप की तरह ढकी थी,अच्छी थी; बाहर निकली तो बहुत झेलनी पड़ी देखा,मेरी ही साथिन मरी पड़ी थी; … more →
aspundir wrote 1 year ago: नारी जीवन पर अथवा नारी रचित कुछ Blogs के पते उपलब्ध हैं- http://bhavanjali.blogspot.com/ चिट्ठाकार: … more →
mehhekk wrote 1 year ago: सबल,सजल,सरल,सढल,सुगंधा,स्वस्तिका बेड़ियाँ को तोड़ कदमो ने ढूंढी है नयी दिशा | ममतामयी,कोमल हृदय,कनखर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तन चंचला मन निर्मला व्यवहार कुशला भाषा कोमला सदैव समर्पिता | नदिया सा चलना सागर से मिलना खुद … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हाइकू- नारी 1. ममता से भरी अन्नपूर्णा कहलाती है जन्मदात्रि 2. जिसके बिना सारा जग सुना सु … more →
mehhekk wrote 1 year ago: top post तू अलबेली , नई नवेली तू रुपसी, छेल छबली चलती हे जब तू ईतरा के चँदनी सी हँसी बिखराए तेरी साद … more →