काहे तूने मटकी तोड़ी वृंदावन में फिर एक नयी सुबह खिली सारी गोपिया पनिया भरन को चली राह भर बतियाती इतराती चलती कान्हा के गुणगान,शराराते बयान करती दूर कही से नटखट कान्हा आए कंकर से मटकी पर निशाना लगाए ए… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: काहे तूने मटकी तोड़ी वृंदावन में फिर एक नयी सुबह खिली सारी गोपिया पनिया भरन को चली राह भर बतियाती इत … more →
mehhekk wrote 1 year ago: यमुना के तट पर गोपियों का जमघट वस्त्राभूषण रख कर जलक्रीड़ा करती सब. नटखट कान्हा आए छुपता दबे पाव तब … more →