शृंगार 1.बिंदिया,झुमका,पायल,बाजूबंद मैं सब कुछ पहनकर आउ एक काला तीट मुझे लगाना, सब की नज़र से मैं बच पाउ | 2.पिया लुभावन, हर दिन में दुल्हन , चाहे सोला शृंगार करे शृंगार उसका अधूरा लागे,जब तक ना… more →
mehhekk wrote 1 year ago: शृंगार 1.बिंदिया,झुमका,पायल,बाजूबंद मैं सब कुछ पहनकर आउ एक काला तीट मुझे लगाना, सब की नज़र से मैं … more →
Tags: शृंगार, Shayari, Kavita, Hindi Poem, Sher, Mehek, mehhekk, Blogroll, dulhan
Follow this tag via RSS