हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे यह ज़ख़्म जाविदा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रmehhekk wrote 4 months ago: न जाने क्यों वो ये कैसे सोच लेता है … more →
mehhekk wrote 4 months ago: कुछ दिल से १. वैसे तो आपकी हर अदा से … more →
mehhekk wrote 5 months ago: ऐसी हर सहर कीजिए नींद खुले देखूं तु … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बा … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम? बदरा सा … more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन … more →
mehhekk wrote 6 months ago: नन्हे से दीपक में सजाई बाती रौशनी च … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: ‘नज़र’ को मग़फ़रत कर ऐ ख़ुदा ऐसा भी क् … more →
विनय प्रजापति wrote 9 months ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने ह … more →
mehhekk wrote 9 months ago: नज़रों के तीर जब निकले कमान से कितने द … more →
विनय प्रजापति wrote 11 months ago: वह मुझे चाहती है या यूँ ही मुझसे बात कर … more →