याद नहीं क्या क्या देखा था सारे मंज़र भूल गये, उसकी गलियों से जब लौटे अपना भी घर भूल गये, ख़ूब गये परदेस कि अपने दीवार-ओ-दर भूल गये, शीशमहल ने ऐसा घेरा मिट्टी के घर भूल गये, तुझको भी जब अपनी क़समें अपने … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 3 years ago: याद नहीं क्या क्या देखा था सारे मंज़र भूल गये, उसकी गलियों से जब लौटे अपना भी घर भूल गये, ख़ूब गये परद … more →