एक तेरा एक मेरा खिलतें है हज़ारों गुलाब जब आते हो तुम साजन फ़िज़ायें भी बहकने लगती है कर खुशबू का रुख़ मेरे आँगन महसूस होती है दूर से ही खुशियों की चहल पहल तेरे आने से पहले ही दस्तक देते अरमानो की होत… more →
meheksarfaraz sagar wrote 4 months ago: Maine tujhko dekha nahi hai magar dil ye kahta hai tu khubsurat hai bahut sharm va hyaa ki devi hai … more →
kavideepaksharma wrote 6 months ago: गगन को चूमते ऊंचे मकान वालों सुनो बहुत दिलकश , मुन्नकश ऐवान वालों सुनो तुम्हें क्यों अपनी इमारत पे ग … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मेरी सांसों में यही दहशत समाई रहती है मज़हब से कौमें बँटी तो वतन का क्या होगा। यूँ ही खिंचती रही दीव … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: दिल में जब तक मैं-तू नहीं हम हैं घर बिखरने के मौके बहुत कम हैं . कौन खींचेगा भला सेहन में दीवार प्या … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: एक साठ वर्षीय नेत्रहीन व्यक्ति, जो शायद रास्ता भूल गया था, एक सुनसान सड़क पर अकेला चला जा रहा था । रा … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जो रोज़ चलती रही जि़स्म पर गोलियाँ और मनती रही खून की होलियाँ तो एक दिन हकीकत हम भूल जायेंगे हो … more →
kavideepaksharma wrote 1 year ago: जाती हूँ दृष्टि जहाँ तक , बादल धुएँ के देखता हूँ अर्चना के दीप से ही , मन्दिर जलते देखता हूँ । देखता … more →
kavideepaksharma wrote 1 year ago: शून्य से निकला है जग शून्य में खोता गया , शून्य के आगे अंक बस शून्य ही होता गया , गिनतियाँ ज़्यादा … more →
kavideepaksharma wrote 1 year ago: जब गुँचा बना है तो गुल भी बनेगा किस्मत है कोई थोडा कोई ज्यादा खिलेगा कोई तोडा जायेगा कोई टूट जायेगा … more →
kavideepaksharma wrote 1 year ago: महज़ अलफाज़ से खिलवाड़ नहीं है कविता कोई पेशा ,कोई व्यवसाय नही है कविता । कविता शौक से भी लिखन … more →
mehhekk wrote 1 year ago: एक तेरा एक मेरा खिलतें है हज़ारों गुलाब जब आते हो तुम साजन फ़िज़ायें भी बहकने लगती है कर खुशबू का रु … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से … more →
mehhekk wrote 1 year ago: न जाने क्यों वो ये कैसे सोच लेता है के उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है साथ होकर भी तरन्नुम-ए-खामो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मनीप्लांट ख्वाहिशो की पारदर्शक बोतल को ख्वाबों के पानी से भर दिया उम्मीद का एक हरा पत्ता जड़ दिया … more →
mehhekk wrote 1 year ago: राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन नही सुने जाते जमाने के ताने उस पर न आने के त … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.मुट्ठी भर चाँदनी पहेले रोज़ खिड़की पर आता था रात रात हमसे बतियाता था भोर की रश्मि आने पर भी हमे न … more →
mehhekk wrote 1 year ago: समान विषमता बापू और अम्मा का छोटा परिवार एक बेटी एक बिटवा दो ही बच्चे हमार कहते है सबसे दोनो को ख … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ऐसी हर सहर कीजिए नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | प … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तेरी याद में कितनी करवटें बदली,कितनी सिलवटें बिखरी नींद से कोसो दूर वो रात भी जागी साथ हमारे गम-ए-जु … more →