वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक ख़ाब माना हमने जिसको वह छाला बनकर फूटा भी जिस कशिश पे हम मर बैठे उस कशिश ने दिल लूटा भी शायिर: विनय … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: वह मुस्कुराया और रूठा भी वह सच्चा है और झूठा भी दूर था तो क़रीब था दिल के उसकी बात से दिल टूटा भी इक … more →
विनय wrote 11 months ago: कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: न वह कभी आँखों से उतारा ही गया और न कभी लबों से पिया ही गया वह इक दर्द का बवण्डर था शायद न जिसे कभी … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने तुमको तुमसे चुराया दिल में अपने तुमको बसाया तुम भी दीवाने हो गये हो दूर जो ख़ुद से हो गये हो आओ … more →
विनय wrote 1 year ago: लो! यह दिन भी क़रीब आ गये जानम जब मैं तुम्हारे लिए सरे-बाम खड़ा होता था इस बरस होली के रंग रास नहीं आ … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए जीता है तेरे लिए, मरता है ते … more →
विनय wrote 1 year ago: याद आती हैं फिर वह तारीख़ें मेरा करना तुम्हारी तारीफ़ें लिखना पुराने ख़तों को दोबारा पूछना क्या नाम ह … more →
विनय wrote 1 year ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे सिर्फ़ तू ही म … more →
विनय wrote 2 years ago: क्यों खेलते हो? जल जाओगे! इक आग है ‘विनय’ तरक़ीब पे तरक़ीब खेलते हो कुछ और है ‘विनय … more →