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wrote 9 months ago: माना की सब झूठ का शहर है —————————— … more →
wrote 1 year ago: गाँधी तेरे देश में ……………. :: कलयुगी त्रिवेणी :: करम करता चल , धरम … more →
wrote 1 year ago: फसली बटेरों का देश “ गाँधी तेरे भारत देश में, चर्चित चेहरे,लेकिन भेद गहरे, अँधा पहचानता है रंग सूरत, … more →
wrote 1 year ago: तुम मीडिया वाले हो. सत्ता के जुमले पढ़ते हो. भाषा इनकी अपनी गाथा गढ़ते हो. इनकी गलियों में चरते हो. … more →
wrote 2 years ago: वो जो बेचते थे जहर अब तक, सुना है पहने झक सफेद कपड़े डाले गले में आला महामारी भगाने की अपनी क्षमता का … more →
wrote 2 years ago: चोर के घर मोर साहूकार के फाका है अँधेरी है ये नगरी और चौपट राजा है सब सफ़ेद यहाँ जो भी काला धंधा है आ … more →
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wrote 2 years ago: नेता! एक ऐसा शब्द जिसके सामने आते ही बस हर कोई अपनी भड़ास निकलने की जी तोड़ कोशिश करता है! बिक गए हैं … more →
wrote 2 years ago: सुनो नेता जी तुम क्यों एक नंगे बच्चे जैसा व्यवहार करते हो जो अपनी आँखें बंद कर लेता है और सोचता है क … more →