विनय wrote 2 months ago: हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़ सुनने में आया है न करेंगे मुझे मुआफ़ उस ने एक भी मौक़ा न दिया मुझ को … more →
विनय wrote 4 months ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →
विनय wrote 6 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →
विनय wrote 7 months ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →
विनय wrote 7 months ago: कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं … more →
Sumit Vijayvargiya wrote 7 months ago: swinging specs in light dancing free, shining bright popping in our sight in a twilight titillating … more →
विनय wrote 7 months ago: To see you, I am not me, you see It’s just the first crush or last may be To see you I do nothing to … more →
Rakesh wrote 8 months ago: Traffic light in the night … more →
विनय wrote 9 months ago: धीरे-धीरे ग़म सहना, किसी से कुछ न कहना फ़ितरत ऐसी हो गयी, दिन-रात मरके जीना शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़ … more →
विनय wrote 9 months ago: I am a destroyer destroying myself so selfishly There is a monster and a devil waking in nights, ins … more →
विनय wrote 9 months ago: Four days were dark without my moon four nights were bare without your dream A moment would be like … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
विनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →
विनय wrote 1 year ago: जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमसे विसाल आया जिस शब तारों की बारात आयी मुझे तुम्हारा ही ख़्याल … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता ह … more →
विनय wrote 1 year ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी सदा तुम्हें जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं मैं कैसे चुनावाऊँ … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़हर पीकर जीने चले कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले आँसू सूखे हुए थे पलकों से बरसते हैं सितारे सारी रात चाँ … more →