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Blogs about: Non Films

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धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो4 comments

Amarjeet Singh wrote 8 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh, Sajda, घटाओं में नहा, जगजीत सिंह, धूप में निकलो

आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा

Amarjeet Singh wrote 8 months ago: आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा इतना मानूस न हो ख़िलवतेग़म से … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh, Sajda, Ahmed Faraz, आँख से दूर न हो दिल से, जगजीत सिंह

मिलकर जुदा हुए तो1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम, एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम, आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात … more →

Tags: A Mile Stone, Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Chitra Singh, जगजीत सिंह, Hmv

तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे5 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तेरे खुशबु मे बसे ख़त मैं जलाता कैसे, जिनको दुनिया की निगाहों से छुपाये रखा, जिनको इक उम्र कलेजे से … more →

Tags: A Mile Stone, Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Movies, Arth, अर्थ

अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निछार होता कोई फ़ितना था क़यामत ना फिर … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Rare Gems, Chitra Singh, जगजीत सिंह, Hmv

तुझसे मिलने की सज़ा देंगे1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तुझसे मिलने की सज़ा देंगे तेरे शहर के लोग, ये वफाओं का सिला देंगे तेरे शहर के लोग, क्या ख़बर थी तेरे … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, Sajda, गज़ल, जगजीत सिंह, Hmv, Lata Mangeshkar

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ू न हुई वो सई-ए-क़रम फ़रमा भी गए इस सई-ए-क़रम का क्या कहिये बहला भी गए तड़पा भी गए हम … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Chitra Singh, Kahkashan 2, जगजीत सिंह, Hmv

रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रात भर दीदा-ए-ग़म नाक में लहराते रहे सांस की तरह से आप आते रहे जाते रहे खुश थे हम अपनी तमन्नाओं का ख़् … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Chitra Singh, Kahkashan 2, जगजीत सिंह, Hmv

किसी का यूं तो हुआ कौन

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: किसी का यूं तो हुआ कौन उम्रभर फिर भी ये हुस्न-ओ-इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी हज़ार बार ज़माना इधर से … more →

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इश्क़ के शोले को भड़काओ

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इश्क़ के शोले को भड़काओ कि कुछ रात कटे दिल के अंगारे को दहकाओ कि कुछ रात कटे हिज्र में मिलने शब-ए-मा … more →

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ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात5 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ग़ज़ल का साज़ उठाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-मीर सुनाओ बड़ी उदास है रात नवा-ए-दर्द में इक ज़िंदगी तो होती है … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Chitra Singh, Kahkashan 2, जगजीत सिंह, Hmv

एक चमेली के मंड़वे तले1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक चमेली के मंड़वे तले मैकदे से ज़रा दूर उस मोड़पर… दो बदन… दो बदन…… दो बदन प्यार की आग में जल गए प्यार … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Chitra Singh, Kahkashan 2, जगजीत सिंह, Hmv

देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात2 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: देखना जज़्बे मोहब्बत का असर आज की रात मेरे शाने पे है उस शोख़ का सर आज की रात नूर ही नूर है किस सिम्त … more →

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ऐ ग़म-ए-दिल क्या करूं

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: शहर की रात और मै नाशाद-ओ-नाकारा फिरूं जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरूं ग़ैर की बस्ती है कब तक दर-ब- … more →

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ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ऐ मलिहाबाद के रंगीं गुलिस्तां अलविदा अलविदा ऐ सरज़मीन-ए-सुबह-ए-खन्दां अलविदा अलविदा ऐ किशवर-ए-शेर-ओ-श … more →

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अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो?2 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब मेरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो? मैने माना के तुम इक पैकर-ए-रानाई हो चमन-ए-दहर में रूह-ए-चमन आरा … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Chitra Singh, Kahkashan 2, जगजीत सिंह, Hmv

अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: अब अक्सर चुप-चुप से रहे हैं यूं ही कभू लब खोले हैं पहले “फ़िराक़” को देखा होता अब तो बहुत … more →

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हमदम यही है1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इज़्न-ए-खिराम लेते हुये आसमां से हम, हटकर चले हैं रहगुज़र-ए-कारवां से हम, क्योंकर हुआ है फ़ाश ज़माने पे … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Kahkashan, Chitra Singh, Kahkashan 2, जगजीत सिंह

तुझ से रुख़सत की वो1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तुझ से रुख़सत की वो शाम-ए-अश्क़-अफ़्शां हाए हाए, वो उदासी वो फ़िज़ा-ए-गिरिया सामां हाए हाए, यां कफ़-ए-पा च … more →

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