Blogs about: Nov 2007

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चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए

Rohit Jain wrote 1 year ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हास … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, आज

क्या देंगे

Rohit Jain wrote 1 year ago: खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे सब सवाल ही गलत हैं फिर जवाब क्या देंगे हर तरफ़ हर जगह हर इक शर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2007

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, नहीं

मोहब्बत रुकी हो तो मय्यत उठा लो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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