Blogs about: Nov 2007
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चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए
चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझ… more »
इक शायर अंजाना सा...
चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए
Rohit Jain wrote 2 months ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो … more »
क्या देंगे
Rohit Jain wrote 2 months ago: खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे … more »
हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं
Rohit Jain wrote 2 months ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नह … more »
मोहब्बत रुकी हो तो मय्यत उठा लो
— 2 comments
Rohit Jain wrote 2 months ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम … more »
