पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का हमें यारों आओ देखें के जिगर कितना उस सफ़्फ़ाक में है जो बदलती है रवानी तो बदल ले कौसर रुख़ बदलने का हुनर… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 10 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये बूँद् में सागर छिपाकर देखिये कितना आसां है जहां को कोसना ख़ुद से ख़ुद को ही … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →