पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का हमें यारों आओ देखें के जिगर कितना उस सफ़्फ़ाक में है जो बदलती है रवानी तो बदल ले कौसर रुख़ बदलने का हुनर… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 5 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →
Rohit Jain wrote 7 months ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: क्यों सब की ज़ुबाँ पे शिकायत का रंग है इन्सान की ये कौन सी आदत का रंग है लड़ते हो ख़ुदाओं के मज़हबों की … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हर ज़ुबाँ से आता हुआ अल्फ़ाज़ जुदा है सब ही की रवायतों का अंदाज़ जुदा है मुफ़लिसी हर आँख में किसी ना किसी … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हास … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे सब सवाल ही गलत हैं फिर जवाब क्या देंगे हर तरफ़ हर जगह हर इक शर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →