Blogs about: November

Featured Blog

कोई सूरज हमारी ताक में है5 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, Rohit, jain, 2008

मोहब्बत में1 comment

Rohit Jain wrote 7 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो2 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता

रंग1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: क्यों सब की ज़ुबाँ पे शिकायत का रंग है इन्सान की ये कौन सी आदत का रंग है लड़ते हो ख़ुदाओं के मज़हबों की … more →

Tags: पुरानी यादें, मेरी गज़लें, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, nov

जुदा1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: हर ज़ुबाँ से आता हुआ अल्फ़ाज़ जुदा है सब ही की रवायतों का अंदाज़ जुदा है मुफ़लिसी हर आँख में किसी ना किसी … more →

Tags: पुरानी यादें, मेरी गज़लें, 2006, कविता, गज़ल, जुदा, जैन, रोहित, jain

चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए

Rohit Jain wrote 1 year ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हास … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

क्या देंगे

Rohit Jain wrote 1 year ago: खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे सब सवाल ही गलत हैं फिर जवाब क्या देंगे हर तरफ़ हर जगह हर इक शर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मोहब्बत रुकी हो तो मय्यत उठा लो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “november”:
Technorati Del.icio.us IceRocket