Blogs about: Nursery Rhymes Kids Poetry

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रेलगाड़ी रेलगाड़ी ,छुक छुक छुक छुक5 comments

अफ़लातून wrote 7 months ago: आओ बच्चों खेल दिखायें छुक-छुक करती रेल चलायें सीटी दे कर सीट पे बैठो एक-दूजे की पीठ पे बैठो आगे-पीछे … more →

Tags: rhyme, Hindi Poems, आशीर्वाद, हरेन्द्रनाथ, चटर्जी, अशोक कुमार, aashirvad, harendranath chatterjee, Ashok Kumar

दोनों मूरख , दोनों अक्खड़ / भवानीप्रसाद मिश्र3 comments

अफ़लातून wrote 9 months ago: चलो भाई चारे को बोओ अक्कड मक्कड , धूल में धक्कड, दोनों मूरख, दोनों अक्खड, हाट से लौटे, ठाट से लौटे, … more →

Tags: भवानी प्रसाद मिश्र, kids poem, akkad-makkad, bhavaniprasad, भवानीप्रसाद, मिश्र, बाल_कविता

नल की हड़ताल6 comments

अफ़लातून wrote 11 months ago: आज सुबह से नल था मौन , पता नहीं कारण था कौन ? मैंने पूछा तनिक पास से , भैय्या दिखते क्यों उदास से … more →

Tags: rhyme, Poem, hindi, Hindi Poems, Hindi Poem, kids poem, Nursery Rhyme, Kid

जुगनू : अल्लामा इक़बाल की बाल कविता5 comments

अफ़लातून wrote 1 year ago: सुनाऊं तुम्हे बात एक रात की, कि वो रात अन्धेरी थी बरसात की, चमकने से जुगनु के था इक समा, हवा में उडे … more →

Tags: hindi, Hindi Poems, Poem, rhyme

यह मुरझाया हुआ फूल है3 comments

अफ़लातून wrote 1 year ago: यह मुरझाया हुआ फूल है, इसका हृदय दुखाना मत । स्वयं बिखरने वाली इसकी, पंखुड़ियाँ बिखराना मत ॥ गुजरो अ … more →

Tags: Hindi Poems, Poem, rhyme, subhadrakumari chauhan

तब कैसा मौसम ठंडा जी !8 comments

अफ़लातून wrote 1 year ago: Technorati tags: बाल कविता, बच्चों की के लिए, राजेन्द्र राजन, rajendr rajan, kid’s poetry, hin … more →

Tags: hindi, Hindi Poems, rajendra rajan, Kids - Poetry, Hindi Poem

जुगनू : अल्लामा इक़बाल की बाल कविता6 comments

अफ़लातून wrote 1 year ago: सुनाऊं तुम्हे बात एक रात की, कि वो रात अन्धेरी थी बरसात की, चमकने से जुगनु के था इक समाँ , हवा में … more →

Tags: Poem

'चार कौए उर्फ़ चार हौए' : [ चिट्ठालोक के बहाने ]9 comments

अफ़लातून wrote 2 years ago: Technorati tags: poem, bhavaniprasadmishra [ कवि भवानीप्रसाद मिश्र ने आपात काल के खिलाफ़ कविताओं की त … more →

Tags: rhyme

जुगनू : अल्लामा इक़बाल की बाल कविता

अफ़लातून wrote 2 years ago: सुनाऊं तुम्हे बात एक रात की, कि वो रात अन्धेरी थी बरसात की, चमकने से जुगनु के था इक समा, हवा में उडे … more →

नल की हडताल1 comment

अफ़लातून wrote 2 years ago: आज सुबह से नल था मौन्, पता नहीं कारण था कौन ? मैंने पूछा तनिक पास से , भैय्या दिखते क्यों उदास से ? … more →

सूरज का गोला ; भवानी प्रसाद मिश्र2 comments

अफ़लातून wrote 2 years ago: सूरज का गोला, इसके पहले ही कि निकलता, चुपके से बोला,हमसे – तुमसे इससे – उससे कितनी चीजों … more →

चार कौए उर्फ़ चार हौए ,भवानी प्रसाद मिश्र2 comments

अफ़लातून wrote 2 years ago: [आपात्काल के दौरान लिखी भवानी बाबू के कविताएं 'त्रिकाल सन्ध्या' में हैं.यहां बाल-कविता के रूप में लि … more →


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