Blogs about: Oct 2007
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ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा
ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में… more »
इक शायर अंजाना सा...
ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा
— 4 comments
Rohit Jain wrote 1 week ago: ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में … more »
तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते
Rohit Jain wrote 2 months ago: तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जात … more »
यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर
Rohit Jain wrote 2 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्स … more »
नया हुनर पाने का वक़्त आया है
Rohit Jain wrote 2 months ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुला … more »
दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां
Rohit Jain wrote 2 months ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़- … more »
सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता
Rohit Jain wrote 2 months ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अप … more »
वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी
Rohit Jain wrote 2 months ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कह … more »
घर हवाओं में बना टिकता है क्या
Rohit Jain wrote 2 months ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसा … more »
बदले बदले
Rohit Jain wrote 2 months ago: जारी हैं क़त्ल अब भी बस सर हैं बदले बदले … more »
