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Blogs about: October

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बदले बदले3 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: जारी हैं क़त्ल अब भी बस सर हैं बदले बदले हैं आज भी वो क़ातिल खंजर हैं बदले बदले इल्ज़ाम हैं लगाते के … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Oct 2007, 2007, कविता, गज़ल, जैन, बदले, रोहित

यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर2 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Oct 2007, 2007, अक़्सर, इम्तिहां, इश्क़, कविता, का

Rockets fired from Gaza as ceasefire ends1 comment

Praful wrote 11 months ago: JERUSALEM (CNN) — Palestinian militants fired more rockets into Israel on Friday as a tenuous … more →

Tags: News, airstrikes, Border, Egytian, Friday, Gaza, Gaza City, Hamas government, Islamic Jihad

Rockets fired from Gaza as ceasefire ends1 comment

Praful wrote 11 months ago: JERUSALEM (CNN) — Palestinian militants fired more rockets into Israel on Friday as a tenuous … more →

Tags: News, airstrikes, Border, Egytian, Friday, Gaza, Gaza City, Hamas government, Islamic Jihad

शायद4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में पायेगा जब उस ख़ुदा ने अर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते

Rohit Jain wrote 1 year ago: तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते एक तकल्लुफ़ ही सही जिसको निभाते जाते क्या ख़ता थी के टूट गये ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

नया हुनर पाने का वक़्त आया है

Rohit Jain wrote 1 year ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुलाने का वक़्त आया है आओ बुझा दें पुरानी शम्मों को नई शम्में जलान … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता

Rohit Jain wrote 1 year ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है ज … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी

Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

घर हवाओं में बना टिकता है क्या

Rohit Jain wrote 1 year ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या हमने तुमको साँस में शामिल किया साँस … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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