विनय wrote 1 year ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम्मीद की धूप रिस गयी है शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: … more →
विनय wrote 1 year ago: आज फिर धुँधले बादलों के पार देखा चाँद, सुनहरा चाँद… आज फिर तेरी याद आयी, आज फिर मेरा जिस्म महक … more →