श्रद्धांजलि आज बहुत दिन बाद कुछ वक्त मिला है तो लिखने की ज़रुरत महसूस हो गयी | शायद खालीपन मुझे पसंद नहीं या कुछ करते रहने की अदा बन गयी है | मैं सपनो अहम् मानता हूँ | हमारी चाहत, डर, पूरानी यादें, सप… more →
Nitin Jalanmequitnever wrote 3 months ago: श्रद्धांजलि आज बहुत दिन बाद कुछ वक्त मिला है तो लिखने की ज़रुरत महसूस हो गयी | शायद खालीपन मुझे पसंद … more →
विनय wrote 11 months ago: जाने कैसी तन्हाई रहती है महफ़िले-यार में दिल में अब भी साँस लेते हैं वह पुराने नाम तुमने मुझे भुलाके … more →