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कुछ सच कुछ झूठ-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम थ … more →

Tags: चिन्तन, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, सृजन, हंसना, हास्य व्यंग्य

आशीर्वाद-लघुकथा2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला ज … more →

Tags: दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, साहित्य, सृजन, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

व्यक्ति में चेतना लाने से ही समाज जागृत होगा-चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अक्सर यह सुनने को मिलता है कि ‘महाभारत घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे क्लेश होता है’। हो सकता … more →

Tags: abhivyakti, Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, संपादकीय

युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन-(हास्य व्यंग्य)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: वह पुराना अभिनेता अपने बैठक कक्ष में सिगरेट पर सिगरेट फूंकता हुआ इधर से उधर चहलकदमी कर रहा था। उसने … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, समाज, साहित्य, सृजन

चुनाव से सम्बन्धित रिपोर्टिंग के लिए प्रेस परिषद के दिशा - निर्देश3 comments

अफ़लातून wrote 3 months ago: प्रेस का यह कर्तव्य होगा कि चुनाव तथा प्रत्याशियों के बारे में निष्पक्ष रिपोर्ट दे । समाचारपत्रों स … more →

Tags: Internet, Politics, News, capitalism, recessation, election, media, Print Media, Hindustan

पाकिस्तान की पैंतरेबाजी और उसके मित्र देश-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: किसी भी राष्ट्र का सम्मान न तब तक नहीं बढ़ सकता जब तक वह दूसरों से मदद लेता है और जब वह दान लेने लगे … more →

Tags: writing, Dashboard, आलेख, हिंदी साहित्य, bharat, web duniya, hindi thought, hindi writer, hindi sahitya

इंसान को पंख नहीं लगा सकता-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जमीन पर आते हुए इंसान ने सर्वशक्तिमान से कहा ‘इस बार इंसान बनाया है इसके लिये शुक्रगुजार हूं पर मुझे … more →

Tags: arebic, Art, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दृष्टिकोण

भारतीय भाषा दिवसः एक फ्लाप लेखक का विशेष संपादकीय2 comments

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: लोग आज इसे हिंदी दिवस कह रहे हैं पर एक हिंदी विद्वान का मत है कि इसे भारतीय भाषा दिवस के रूप में मना … more →

Tags: Blogroll, writing, vyangya, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, हास्य व्यंग्य

चिट्ठेकारी का दूसरा साल11 comments

अफ़लातून wrote 10 months ago: १५ अगस्त २००६ को हिन्दी का चिट्ठा शुरु किया था । एक साल पूरा होने पर मूल्यांकन किया था । इस चिट्ठे प … more →

Tags: Blogroll, globalisation , privatisation, Internet, kishan patanayak, aggregator, Blogging, index, Progress Report, Annual Report

चमत्कार को नमस्कार, सहजता से कोई नहीं सरोकार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: इस प्रथ्वी पर जीवन अपनी सहज धारा से बहता जाता है। अनेक आपदायें इस प्रथ्वी पर आती हैं पर फिर सब कुछ स … more →

Tags: Blogroll, writing, vyangya, aastha, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, आस्था, आध्यात्म

इस ब्लाग/पत्रिका की पाठक संख्या 25 हजार के पार-विशेष संपादकीय2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मेरा यह ब्लाग@पत्रिका पाठक संख्या 25 हजार पार कर गया। वेसे देखा जाये कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना

कीचड़ उछालने पर मिठाई मिलेगी सोचा न था-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लागर साइकिल चलाता हुआ घर पहुंचा तो पत्नी ने उसे देखते ही पूछा-‘क्या कहीं कीचड़ में गिर गये थे जो … more →

Tags: vyangya, inglish, अभिव्यक्ति, India, हास्य व्यंग्य, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, Internet

मानते नहीं तो फिर पत्थर क्यों उड़ाते-कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते हैं पत्थर के बुतों में भगवान नहीं मानेंगे पर भगवान के बुत उड़ाने पहुंच जाते जवाब नहीं देना इसल … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, व्यंग्य चिंतन, शेर-ओ-शायरी, शायरी, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

बनते बिगड़ते हैं रंग और इंसान -कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →

Tags: vyangya, vividha, inglish, संपादकीय, कविता, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

ब्लाग गिरा सकता है, भाषा की दीवारें-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर छद्म मित्रों और आलोचकों ने मेरी सोच को बहुत संकीर्ण बना दिया है। इसलिये अगर अपने ब्लाग/ … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, चिन्तन, India, हास्य व्यंग्य, आलेख

मैत्री संदेशों से बचने की कोशिश-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक महिला ब्लाग लेखिका ने किसी वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल लिखते हुए क्लिक किया होगा। बस उसके संपर्क में … more →

Tags: writing, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, India, इंडिया, हास्य व्यंग्य, अनुभूति

ब्लाग लेखक (http://) का मतलब एक सामान्य उपभोक्ता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी ब्लाग जगत का व्यवसायिक रूप करीब-करीब मैंने समझ लिया है और अब मुझे किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है … more →

Tags: writing, vyangya, Thought, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, India, भारत

'चरखा' वाले अमन के 'जज्बात' की कद्र करें5 comments

अफ़लातून wrote 1 year ago: दस वर्षों तक चरखा फीचर सेवा के सम्पादक रह चुके अमन नम्र ने अपने जज्बात इसी नाम के चिट्ठे पर प्रकट कर … more →

Tags: Aman, jajbat, namra

कुछ कुछ नहीं बहुत कुछ होता है-समीक्षा1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुना के बृजमोहन श्रीवास्तव जी का ब्लाग अब ब्लागवाणी, चिट्ठाजगत, नारद और हिंदी ब्लाग पर आ गया है। आज … more →

Tags: arebic, कला, दीपक भारतदीप, भारत, भाषा, संपादकीय, साहित्य, सृजन, हिंदी साहित्य


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