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बासी खबर में उबाल-हिंदी व्यंग्य कविता (basi khabar men ubal-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अखबार में छपी हर खबर पुरानी नहीं हो जाती है। कहीं धर्म तो कहीं भाषा और जाति के झगड़ों में फंसे इंसानी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

रिश्ता और सवाल जवाब-हास्य कविता (rishta aur sawal jawab-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: रिश्ता तय करने पहुंचे लड़के ने लड़की से पूछा ‘‘क्या तुम्हें खाना पकाना सिलाई कढ़ाई, बुनाई तथा घर गृहस्थ … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, लघुकथा, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की म … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, Education, Blogging, समाज, web duniya

सर्वशक्तिमान नहीं पैसा बनाता है जोड़ी-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: कौन कहता है ऊपर वाला ही बनाकर भेजता इस दुनियां में जोड़ी पचास साल के आदमी के साथ कैसे जम सकती है बाई … more →

Tags: Blogroll, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Internet, क्षणिका, Education, Family

जज्बात की पतली धारा-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: पड़ौसन ने कहा उस औरत से ‘तुम्हारा आदमी रात को रोज शराब पीकर आता है पर तुम कुछ नहीं कहती वह आराम से स … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य कविता, media, Internet, क्षणिका, Education

प्रतियोगिता से कहीं अधिक वजन जंग में आता है-लघु व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →

Tags: vews, inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Life, media, Internet, Bloging

चुंबन का स्वाद न मीठा होता है न नमकीन-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं … more →

Tags: hasya -vyangya, hasya vyang, vyangya, writer, aritile in hindi, हिंदी आलेख, हिंदी, hindi article, swad

क्या आतंकी हिंसा अपराध शास्त्र से बाहर का विषय है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Internet, Education, Blogging, Friends, समाज

खास वर्ग के सुझाये मुद्दों से परे हटे बिना एकता संभव नहीं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन अफलातून जी ने अंतर्जाल पर सीधे वार्तालाप के दौरान उन्होंने अपने शैशव ब्लाग का एक पाठ पढ़ने के … more →

Tags: inglish, संपादकीय, Life, media, Internet, Education, Family, Love, Friends

अपनी कविताओं से दूसरों के ईमेल कूड़ेदान की तरह नहीं सजाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →

Tags: inglish, कविता, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, क्षणिका, Urdu, Education, Family

आखिर वह ब्लाग परिदृश्य से गायब हो गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज वह ब्लाग गायब हो गया जो दूसरों के ब्लाग के पाठ चालाकी से अपने यहां ले जाकर अपने यहां सजा रहा था। … more →

Tags: Blogroll, inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, Bloging, Education, Family

आखिर उसने इस ब्लाग के पूर्व पाठ की कापी क्यों नहीं की-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →

Tags: Blogroll, vews, hindiblogroll, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, Life, media

इसे ब्लाग के पाठ की चोरी कहें या चालाकी-आलेख4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक वरिष्ठ ब्लाग लेखक ने चिट्ठाकार समूह की चर्चा के सूचित किया कि एक ब्लाग चोर और नजर आया है। ऐसी … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

इस तरह लगने लगा वहां भी मेला-हास्य कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उदास बैठा था चेला तो गुरू ने उसका कारण पूछा तो वह बोला ‘गुरूजी सभी आश्रम पर भक्तों का लगता है मेला ख … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, लघुकथा, व्यंग्य कविता

मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →

Tags: vews, inglish, कविता, अभिव्यक्ति, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Internet

विविध और रोचक विषयों पर लिखे जाने पर पाठक आकर्षित होंगे-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन पड़ौस में दिल्ली से कोई दंपत्ति आये थे। संयोग से उनकी मेरी पत्नी से चर्चा हुई होगी। मेरी पत्न … more →

Tags: Blogroll, inglish, आध्यात्म, संपादकीय, अभिव्यक्ति, Life, Internet, Blogging, समाज

अंतर्जाल पर किसी से द्वेष रखना बेकार-आलेख 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे एक ऐसा ब्लाग जिस पर मैं ही तीन-तीन महीने जाकर नहीं देखता कि वहां क्या हो रहा है? ऐसा ब्लाग जिस … more →

Tags: vews, देश-विदेश, inglish, हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Life

इसलिए आज हमने कोई व्यंग्य नहीं लिखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिको … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, हिन्दी, Global Dashboard, अभिव्यक्ति, सूचना, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य

प्यार और नफरत, दोनों पर यकीन नहीं-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग म … more →

Tags: vews, inglish, sher-o-shayree, संपादकीय, अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता


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