ओस पड़े बहार पर आग लगे कनार में, तुम जो नहीं कनार में लुत्फ़ ही क्या बहार में, उस पे करे ख़ुदा रहम गर्दिश-ए-रोज़गार में, अपनी तलाश छोड़कर जो है तलाश-ए-यार में, हम कहीं जानेवाले हैं दामन-ए-इश्क़ छोड़कर, ज़ीस्त… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: ओस पड़े बहार पर आग लगे कनार में, तुम जो नहीं कनार में लुत्फ़ ही क्या बहार में, उस पे करे ख़ुदा रहम गर्द … more →