रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका चाँद को कभी बादलों से उठाया भी गदेली पर रखकर उसे कभी होंटों तक लाया भी रातभर चाँद देखा किये माज़ी मे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 6 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →