mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो क … more →
mehhekk wrote 2 years ago: फ़िज़ा यूँ ही आज ख़याल आया , देखु रूप पलटकर कुछ पल महसूस करू , फ़िज़ा में बदलकर | फ़िज़ा बनकर मैं , … more →
mehhekk wrote 2 years ago: अब तक तुम गहरी नींद सोए हुए हो किन सच्चे झूठे सपनो में खोए हुए हो वो कौनसी यादे है जो पीछा नही छोड़त … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 2 years ago: मैंनें देखा बन के पंछी , नीलगगन में उड़ के देखा । मैंनें देखा बन के किरणें , चारों और बिखर के देखा । … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 2 years ago: मैंनें देखा बन के पंछी , नीलगगन में उड़ के देखा । मैंनें देखा बन के किरणें , चारों और बिखर के देखा । … more →