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Blogs about: Parsonal

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सम्मान का भ्रम-हिन्दी हास्य व्यंग्य (samman ka bhram-hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: दीपक बापू तेजी से अपनी राह चले जा रहे थे कि पान की एक दुकान के पास खड़े आलोचक महाराज ने उनको आवाज देक … more →

Tags: arebic, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, हास्य व्यंग्य

किताबों में लिखे शब्द दुनियां नहीं चलाते-व्यंग्य कविता (kitab,shabd aur duniya-vyangya kavita)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi bharat, hindi bhasha

फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Family, Friends, hasya kavita, hasya vyang

हमदर्दी कला-व्यंग्य कविता (art of sypothy)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम

रौशनी और अंधेरे की जंग-लघुकथा (roshni aur andher ke jang-hindi laghu katha)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: वैसे तो उन सज्जन की कोई इतनी अधिक उम्र नहीं थी कि दृष्टिदोष अधिक हो अलबत्ता चश्मा जरूर लगा हुआ था। ए … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, विश्वास, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, कला

भीड़ में अपनी पहचान मत ढूंढो-व्यंग्य कविता (pahchan-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भीड़ में अपनी पहचान ढूंढते हुए क्यों अपना वक्त बर्बाद करते हो. भीड़ जुटाने वाले सौदागरों के लिए हर श … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging

नए स्वांग और मुखौटे-हास्य व्यंग्य कविताएँ (svang aur mukhaute-hindi satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: रोज रचते हैं नया स्वांग चेहरे पर लगाते नए मुखौटे और बदलकर आते हैं कपड़े मगर छद्म होकर भी करते हैं हमे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, E-patrika

कौटिल्य दर्शन-दोस्त और दुश्मन दो प्रकार के होते हैं (kautilya darshan-dost aur dushman)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, alekh, arebic, Article, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन

जब उनके पुतलों की पोल खुल जायेगी-हिंदी कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पर्दे के पीछे वह खेल रहे हैं सामने उनके पुतले डंड पेल रहे हैं। आत्ममुग्धता हैं जैसे जमाना जीत लिया स … more →

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घर का रोना-हास्य व्यंग्य कविता (ghar ka rona-vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: छायागृह में चलचित्र के एक दृश्य में नायक घायल हो गया तो एक महिला दर्शक रोने लगी। तब पास में बैठी दूस … more →

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कड़वा सच बोलकर क्यों संताप सहो-हिंदी कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहो कुछ भी करो कुछ और। बन जाओगे जमाने के सिरमौर। सभी को सुनने में अच्छा लगे ऐसे शब्द अपने मुख से कहो … more →

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लहरें देखकर खेलने का मन करता है-हिंदी कविता(lahren aur man-hindi kavita)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जिंदगी की इस धारा में किस किसकी नाव पार लगाओगे। समंदर से गहरी है इसकी धारा लहरे इतनी ऊंची कि आकाश का … more →

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हमदर्दी बेजान होकर जताते-हिंदी कविता (bezan hamdard-hindi poem

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अक्सर सोचते हैं कि कहीं कोई अपना मिल जाए अपने से हमदर्दी दिखाए मिलते भी हैं खूब लोग यहाँ पर इंसान और … more →

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नोबल और ग्लोबल-व्यंग्य आलेख (noble and global-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा को शांति के लिये नोबल पुरस्कार मिलने पर स्वयं उनको ही बहुत बड़ा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भाषा, व्यंग्य चिंतन

भर्तृहरि नीति शतक-कविताओं से बहकाया जाता है (hindi santdesh-kavitavon se bharam

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ————————- सत्यत्वे न शशा … more →

Tags: Hindi knowledge, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, hindu dharm, hindi abhivyakti, hindi chating, hindi megzine, hindi thinking

शिशुओं का क्रीड़ाश्रम और मिठाई-हिन्दीहास्य व्यंग (child story and sweats-hindi vyanga

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →

Tags: writing, हिन्दी, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, India, हास्य व्यंग्य, अनुभूति

बहस कि कामेडी-हिंदी लघु व्यंग्य (disscusion as a comedy-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: उस उद्यान में ज्ञानियों के बीच देश की गरीबी मिटाने के लिये बहस चल रही थी। विषय था देश में गरीबी और श … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, Blogroll, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

बनाते हैं अपनी दुनियां खुद-हिंदी कविता (khud banate apne duinyan-hindi kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धरती पर अपने कदम दर कदम चलते हुए जब नजर करता हूं नीचे की तरफ तब जहां तक देखता हूं वहीं तक ख्याल चलते … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर, हिन्दी

चाणक्य दर्शन-जीवन में जागरुकता आवश्यक (chankya darshan in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गूढ़मैथुनचरित्वं च काले काले संग्रहम्। अप्रमत्तमविश्वासं पंच शिक्षेच्च वायसात्।। हिंदी में भावार्थ-छि … more →

Tags: अध्यात्म, आलेख, कला, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi Personal


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