विनय wrote 1 year ago: जाने कैसी तन्हाई रहती है महफ़िले-यार में दिल में अब भी साँस लेते हैं वह पुराने नाम तुमने मुझे भुलाके … more →
विनय wrote 1 year ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना … more →
khudra wrote 1 year ago: Parliament Standing Committee on Commerce invites suggestions of public on Foreign and Domestic inve … more →
विनय wrote 1 year ago: Silky woolen dishier body Come on baby Let’s celebrate the party Silky woolen dishier body How … more →
विनय wrote 1 year ago: महफ़िले-उश्शाक़ में आशिक़ हम-सा न पाओगे बेकार की बातें हैं सभी दिल को कब तक जलाओगे सहर में शुआ शाम को म … more →
विनय wrote 2 years ago: जिससे दुनिया ने हर चीज़ छीनी जिसे अपनी चाहत न मिली जिसके दरवाज़े पर खु़शी आकर लौट गयी जिसकी आँखों से न … more →
विनय wrote 2 years ago: मेरे ही हाथों में टूटा है दम मेरा तेरे ही स्पर्श से तख़लीक़ हुआ है यह ‘विनय’… नया जन्म हुआ है त … more →