किसी भी रोग के मूल में व्यक्ति के भाव ही होते हैं। शरीर की विभिन्न ऊर्जाओं का संचलन भावों के द्वारा ही प्रतिपादित होता है। भावों के कारण ही ऊर्जाएं सन्तुलित रहती हैं और ऊर्जाओं का असन्तुलन ही रोगों का… more →
Gulabkothari's Bloggulabkothari wrote 2 weeks ago: किसी भी रोग के मूल में व्यक्ति के भाव ही होते हैं। शरीर की विभिन्न ऊर्जाओं का संचलन भावों के द्वारा … more →
gulabkothari wrote 2 weeks ago: कि मां कहती है लडका अच्छा है मेरा मान करता है मित्रता चाहता है किंतु डरती हूं मैं आगे बढने से जानती … more →
gulabkothari wrote 2 weeks ago: महाराष्ट्र में एक विधायक को राष्ट्र भाषा में शपथ लेने के कारण पार्टी विशेष के विधायकों की आक्रामकता … more →
gulabkothari wrote 3 weeks ago: श्रवण हमारी अतीव शक्तिशाली इन्द्रिय है। सुनी हुई बात यदि मन मे घर कर जाती है तो बरसों तक हमारे कान म … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: भारत आज एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। उसे अपनी क्षमता सिद्ध करते हुए शिखर पर भी पहुंचना है और स्वा … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: उलूक यानी उल्लू, लक्ष्मी का वाहन। जो लक्ष्मी के साथ रहकर भी अंधेरे को प्रकाश मानकर विचरण करे, वही उल … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: पशुभाव है कर्म ज्ञान के बिना ज्ञान भी बन जाता है विष बिना उपयोग के। पैदा किसने किया अज्ञान को कौन कर … more →
mypatrika wrote 1 month ago: सर्दी जुकाम दुनिया का सबसे आम रोग है और इससे छुटकारा पाने के तरीके भी सामान्य ही हैं। लेकिन जितनी अव … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: षोडषी अथवा स्वीट सिक्सटीन की अवधारणा इसलिए महत्वपूर्ण है कि जन्म के बाद प्रतिवर्ष एक-एक कला का पूर्ण … more →
mypatrika wrote 1 month ago: भविष्य पुराण के अनुसार जिनकी अंगुलियों के बीच छिद्र होता है, उन्हें आमतौर पर धन की तंगी रहती है। जिन … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: लता मंगेशकर का नाम स्वयं में एवरेस्ट शिखर है। गायकी का पर्यायवाची बन गई हैं। करोडों लोग जिसकी प्रशंस … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: समाज की इकाई है—परिवार और परिवार की इकाई है—व्यक्ति। व्यक्ति अच्छे होंगे तो परिवार भी अच्छा होगा। स … more →
gulabkothari wrote 1 month ago: हमारे देश में पौराणिक देवियों को षोडशी माना जाता है। कहा जाता है कि इनकी आयु सदा सोलह साल की ही रहती … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: व्यक्ति का जीवन भावों के आधार पर चलता है। भाव ही जीवन का स्वरूप तय करते हैं, जीवन को गति प्रदान करते … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: जीवन में व्यवहार के दो धरातल हैं। एक ज्ञान प्रधान और दो, क्रिया प्रधान। ज्ञान प्रधानता में- संकल्प, … more →
mypatrika wrote 2 months ago: आंखों से आंसू बहाने वाला अर्थात रोने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है तथा उसके चेहरे एवं त्वचा में निखा … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: ज्ञान और कर्म अलग नहीं हैं। सदा ही साथ रहते हैं। आनन्द- विज्ञान-मन-प्राण-वाक् (शरीर) से हमारे पंचकोश … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: सकारात्मक होना या नकारात्मक होना केवल अभ्यास की बात है। जीवन में संस्कारों को तो आसानी से नहीं बदला … more →
gulabkothari wrote 2 months ago: गलतियों का पुतला है आदमी। भोलेपन में, प्रवाह में, आवेश में, नादानी में, हो सकती हैं गलतियां। क्या जर … more →