आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ आदाब तुझे मेरे जानो-तन लखनऊ है कभी आईना कभी शराब-सा तू है मेरी शोख़ी मेरा बाँकपन लखनऊ है तू ही मुस्लमाँ और तू ही है हिन्दू निकहते रहे तेरे गुलशन लखनऊ लहज़ा लुत्फ़ ज़ुबाँ और मेरी… more →
तख़लीक़-ए-नज़रKrishna Kumar Mishra wrote 3 months ago: हे ग्राम देवता ! नमस्कार ! Mahadeo सोने-चाँदी से नहीं किंतु तुमने मिट्टी से दिया प्यार । हे ग्राम दे … more →
विनय wrote 1 year ago: आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ आदाब तुझे मेरे जानो-तन लखनऊ है कभी आईना कभी शराब-सा तू है मेरी शोख़ी मेरा … more →