फिर कुछ इस दिल को बेक़रारी है, सीना ज़ोया-ए-ज़ख़्म-ए-कारी है, फिर जिगर खोदने लगा नाख़ून, आमद-ए-फ़स्ल-ए-लालाकारी है, फिर उसी बेवफ़ा पे मरते हैं, फिर वही ज़िंदगी हमारी है, बेख़ुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’,… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: फिर कुछ इस दिल को बेक़रारी है, सीना ज़ोया-ए-ज़ख़्म-ए-कारी है, फिर जिगर खोदने लगा नाख़ून, आमद-ए-फ़स्ल-ए-लाल … more →