रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान चाँद के बिन सितारे अधूरे से लगते है | समंदर की गहराई में छुपाया जो खजाना मोतियो के बिन सीप अधूरे से लगते है | इज़हार करने जाओ जो गम-ए-जमाना आसुओ के बिन नयन अधूरे से ल… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: रुपहली किरनो से सजाया जो आसमान चाँद के बिन सितारे अधूरे से लगते है | समंदर की गहराई में छुपाया जो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते | इश्क़ की मुश्किल … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हम तुम अलग अलग दो तन एक मन बाहों में ये कंपन हमारी तुम्हारी बढ़ती धड़कन हम फूल तुम खुशबू … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ऐसी कशीश है तुझमें ,खिची चली आती हूँ साथ मेरे मन की तरंगे, तुमसे बाटने लाती हूँ | तुमसे मेरा र … more →
mehhekk wrote 1 year ago: दीदार खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात सज सवर कर बैठी है नही करती किसीसे बात कुछ भी कहो ,ग … more →