फुलों की तरह लब खोल कभी ख़ूश्बू की ज़ुबा मे बोल कभी अलफ़ाज़ परखता रेहता है आवाज़ हमारी तोल कभी अन्मोल नहीं लेकिन फिर भी पूछो तो मुफ़्त का मोल कभी खिड़की में कटी है सब राते कुछ चौर्स थीं, कुछ गोल कभी ये दिल भ… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: फुलों की तरह लब खोल कभी ख़ूश्बू की ज़ुबा मे बोल कभी अलफ़ाज़ परखता रेहता है आवाज़ हमारी तोल कभी अन्मोल नही … more →