इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे शायिर: विनय प्रजापत… more →
तख़लीक़-ए-नज़रwrote 1 month ago: पुरा दक्षिणात्यः कश्चित् कविः न्यायशास्त्रमध्येतुं इच्छन् वंगदेशे नवद्वीपं गतवान्। तद्दिनेषुव् अधिकश … more →
wrote 1 year ago: भूली है मुझको यूं जैसे कभी जानती ही नहीं थी तू तेरे बिन कैसे कटा है यह सफर अब तक बयान कर सकता हूँ मै … more →
wrote 1 year ago: इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-म … more →
wrote 1 year ago: जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे हम को शाइर तो न समझते होंगे ‘विनय जी’ कैसे लिखते हैं आप ऐस … more →
wrote 2 years ago: From last two days I’m strung out of love n’ sketching my reverie… A poet is haunt … more →