इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-मुक़ाबिल से हम भी मैदाँ में हैं वह क्या कहेगा शे’र, हम ज़बाने-लहू को तराशेंगे शायिर: विनय प्रजापत… more →
तख़लीक़-ए-नज़रneeravsood wrote 7 months ago: भूली है मुझको यूं जैसे कभी जानती ही नहीं थी तू तेरे बिन कैसे कटा है यह सफर अब तक बयान क … more →
विनय wrote 1 year ago: इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-म … more →
विनय wrote 1 year ago: जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे हम को शाइर तो न समझते होंगे ‘विनय जी’ कैसे लिखते हैं आप ऐस … more →