दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दाग तो था , पर, वो उसकी खूबसूरती को ओर भी बढा रहा था। मैं उसकी आभा में ऐसी खोई, कि एकटक उसे निहारत… more →
कुछ िदल सेkalapiketan wrote 1 week ago: लाज ओढूं (गीत) घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 2 weeks ago: याद आया गझल घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 2 weeks ago: चैतकी रजनी और् चंद्रमा अछांदस घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 3 weeks ago: “माँ कह एक कहानी।” मैथिलीशरण गुप्त ——————— … more →
kalapiketan wrote 4 weeks ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 4 weeks ago: मरूध्यान ना बने मुक्तक घनश्याम ठक्कर … more →
kalapiketan wrote 1 month ago: नही! गझल घनश्याम ठक्कर … more →
simplysunidhi wrote 1 month ago: Apne gam khud jhelte hain kissi se gila nahi karte !!Faulaad ka jism rakhte hain hum dhoop se pighla … more →
simplysunidhi wrote 1 month ago: ZINDGI MAIN SADA MUSKURATE RAHO, FASLE KAM KARO DIL MILATE RAHO. DARD KAISA BHI HO AAKHEIN NUM NA KA … more →
simplysunidhi wrote 1 month ago: बरसों पहले नानी ने माँ से कहा था तुम फलांगना चाहती हो पहाड़ झाँकना चाहती हो बादलों के … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
inkblacknight wrote 1 month ago: तुम कहती हो तो भुला देता हू तुम्हे और मिटा देता हू सारी रोशनी जो तुम ने मुझे दी उन पन्नो के भी कर दे … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए मुझे मा … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए मुझे मा … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय … more →